A2Z सभी खबर सभी जिले कीअन्य खबरेउत्तर प्रदेशगोंडा

गोंडा: बगैर मान्यता अवैध स्कूलों पर कार्रवाई के आदेश कागजों में कैद, जिम्मेदारों की चुप्पी

IMG 20250702 WA0283 IMG 20250702 WA0282 IMG 20250702 WA0284गोंडा: बगैर मान्यता अवैध स्कूलों पर कार्रवाई के आदेश कागजों में कैद, जिम्मेदारों की चुप्पी

गोंडा। जिले में बिना मान्यता के संचालित हो रहे अवैध स्कूलों के खिलाफ जिलाधिकारी के कार्रवाई के आदेश महज कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं। पिछले दो महीनों में न तो इन स्कूलों को बंद किया गया और न ही संचालकों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया गया। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने 26 अप्रैल को जिले की चारों तहसीलों के तहसीलदारों, थानाध्यक्षों और खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को संयुक्त रूप से कार्रवाई कर 15 दिनों के भीतर अवैध स्कूलों को बंद करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। लेकिन, इस आदेश का पालन न के बराबर हुआ। केवल कर्नलगंज क्षेत्र की बीईओ ने स्कूल बंद कराने के दावे किये हैं जिसकी हकीकत धरातल पर देखने से सामने आ सकती है,जबकि अन्य क्षेत्रों से कोई जानकारी नहीं मिली। इससे अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है, और माना जा रहा है कि जुलाई में ये स्कूल फिर से खुल सकते हैं। जिले के विभिन्न विकास खंडों में कुल 163 अवैध स्कूल चिह्नित किए गए हैं। इनमें बभनजोत में 25, नवाबगंज में 22, हलधरमऊ में 11, इटियाथोक में 10, परसपुर और मुजेहना में 9-9, कटरा बाजार, रुपईडीह, मनकापुर, तरबगंज में 8-8, कर्नलगंज, झंझरी, पंडरी कृपाल, छपिया, वजीरगंज, बेलसर में 7-7 और नगर क्षेत्र में 3 स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, जिससे कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जब सरकार स्कूलों के युग्मन की कार्रवाई कर रही है, जो कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) नियमों के खिलाफ है, तब अवैध स्कूलों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? यह बेसिक शिक्षा व्यवस्था को खत्म करने की साजिश लगती है।” उन्होंने चेतावनी दी कि शिक्षक संगठन इसका पुरजोर विरोध करेगा।

बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल कुमार तिवारी ने बताया कि विभाग ने 163 अवैध स्कूलों को चिह्नित किया है। उन्होंने दावा किया कि एक जुलाई से स्कूल खुलने के बाद अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अधिकारियों की अब तक की निष्क्रियता को देखते हुए इस दावे पर भरोसा करना मुश्किल लग रहा है। जिले में बेसिक शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और अवैध स्कूलों के संचालन से अभिभावकों और छात्रों के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं।

 

[yop_poll id="10"]
Show More
Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!